पहला बच्चा सिजेरियन से हुआ है, और अब दूसरी बार सोच रही हैं। सबसे पहला सवाल यही आता है कि इस बार नॉर्मल हो पाएगा या फिर से ऑपरेशन करवाना पड़ेगा।
रीवा और आसपास के इलाकों में इसका जवाब अक्सर घर के बड़े लोग दे देते हैं। किसी की भाभी का दूसरा बच्चा नॉर्मल हुआ था, तो लगता है सबका हो जाएगा। किसी की पड़ोसन को दिक्कत हुई थी, तो लगता है किसी का नहीं हो सकता।
सच्चाई दोनों के बीच में है। बहुत सी महिलाओं का दूसरा बच्चा नॉर्मल डिलीवरी से होता है। बहुत सी का नहीं हो सकता। और यह फैसला किसी एक बात पर नहीं, कई बातों को देखकर लिया जाता है।
सबसे ज़रूरी बात यह है कि पहला सिजेरियन क्यों हुआ था
यही वह सवाल है जिस पर सबसे ज़्यादा टिका होता है, और यही वह सवाल है जिसका जवाब ज़्यादातर महिलाओं को याद नहीं रहता।
अगर पहला ऑपरेशन इसलिए हुआ था कि बच्चा उल्टा था, या उस समय बच्चे की धड़कन में दिक्कत आ गई थी, या पानी समय से पहले चला गया था, तो यह ऐसा कारण है जो दोबारा हो भी सकता है और नहीं भी। ऐसे मामलों में नॉर्मल डिलीवरी की संभावना अच्छी रहती है।
लेकिन अगर पहला सिजेरियन इसलिए हुआ था कि रास्ता छोटा था, या बच्चा किसी भी हालत में आगे नहीं बढ़ रहा था, तो यह कारण दूसरी बार भी वैसा ही रहेगा।
इसलिए पुराना discharge card संभालकर रखना इतना ज़रूरी है। उसमें लिखा होता है कि ऑपरेशन क्यों किया गया और बच्चेदानी पर चीरा किस तरह का लगाया गया था। यह कागज़ आपके पास है, तो पहली ही मुलाकात में तस्वीर काफ़ी साफ़ हो जाती है।
किन हालात में नॉर्मल डिलीवरी की कोशिश की जाती है
आमतौर पर तब, जब:
- पिछला सिजेरियन सिर्फ़ एक बार हुआ हो
- बच्चेदानी पर नीचे की तरफ़ आड़ा चीरा लगा हो, जो ज़्यादातर मामलों में लगाया जाता है
- पिछली डिलीवरी और इस गर्भ के बीच कम से कम डेढ़ से दो साल का अंतर हो
- इस बार एक ही बच्चा हो और वह सिर नीचे की स्थिति में हो
- इस गर्भ में BP, sugar या कोई और बड़ी दिक्कत न हो
- दर्द अपने आप शुरू हुआ हो
आखिरी बात लोग सबसे कम समझते हैं। पिछले सिजेरियन के बाद दर्द जबरदस्ती शुरू करवाने वाली दवाइयों से खतरा बढ़ जाता है, इसलिए ऐसे मामलों में इंतज़ार किया जाता है कि दर्द खुद उठे।
किन हालात में दोबारा ऑपरेशन ही सही रहता है
- जब बच्चेदानी पर पिछली बार खड़ा चीरा लगा हो
- जब दो या उससे ज़्यादा बार सिजेरियन हो चुका हो
- जब पिछली बार बच्चेदानी फटने जैसी कोई दिक्कत आई हो
- जब इस बार बच्चा उल्टा या आड़ा हो
- जब आँवल नीचे रास्ते के सामने आ गई हो
- जब पिछली डिलीवरी को अभी डेढ़ साल भी पूरे न हुए हों
इनमें से कोई एक भी बात हो, तो जोखिम उठाने का कोई फ़ायदा नहीं है। दूसरा सिजेरियन कोई हार नहीं है। यह उस स्थिति में सबसे सुरक्षित रास्ता होता है।
जो खतरा है, उसे साफ़ शब्दों में समझ लीजिए
सिजेरियन के बाद नॉर्मल डिलीवरी में एक खतरा रहता है, कि दर्द के दौरान पुराने टाँके वाली जगह पर बच्चेदानी कमज़ोर पड़ जाए।
यह बहुत कम होता है। नीचे आड़ा चीरा लगे मामलों में सौ में एक से भी कम। लेकिन जब होता है, तो उसी मिनट ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ती है। मिनटों की बात होती है, घंटों की नहीं।
इसीलिए इस कोशिश की एक शर्त है, जिस पर कोई समझौता नहीं होता।
यह कोशिश कहाँ करनी चाहिए
सिजेरियन के बाद नॉर्मल डिलीवरी की कोशिश सिर्फ़ ऐसी जगह होनी चाहिए जहाँ ज़रूरत पड़ते ही तुरंत ऑपरेशन हो सके। इसका मतलब है कि operation theatre उसी इमारत में हो, anaesthesia की व्यवस्था हो, और खून का इंतज़ाम हो।
गाँव के छोटे सेंटर पर या घर पर यह कोशिश नहीं की जानी चाहिए। वहाँ दिक्कत आने पर एम्बुलेंस बुलाने, शहर पहुँचने और भर्ती होने में जो समय जाता है, वही सबसे बड़ा खतरा बन जाता है।
आदर्श हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में labour room और operation theatre एक ही इमारत में हैं, इसलिए दर्द के दौरान स्थिति बदलने पर कहीं ले जाने की नौबत नहीं आती।
फैसला कब होता है
एक ही दिन में नहीं। और डिलीवरी वाले दिन तो बिल्कुल नहीं।
गर्भावस्था के दौरान जांच में देखा जाता है कि बच्चे का वज़न कैसा बढ़ रहा है, बच्चा किस स्थिति में है, पुराने टाँके वाली जगह कैसी है, और आपकी सेहत क्या कह रही है। नौवें महीने तक तस्वीर काफ़ी हद तक साफ़ हो जाती है।
इसीलिए जांच जल्दी शुरू करना ज़रूरी है। आठवें महीने में पहली बार आकर यह सवाल पूछना, अपने ही विकल्प कम कर लेना है।
अभी क्या करें
- पुराना discharge card और operation notes ढूंढकर निकाल लीजिए
- पिछली सारी sonography रिपोर्ट एक फ़ाइल में रख लीजिए
- गर्भ की पुष्टि होते ही पहली जांच करवा लीजिए, तीसरे महीने का इंतज़ार मत कीजिए
- पहली मुलाकात में सीधे पूछिए कि आपके मामले में नॉर्मल डिलीवरी की गुंजाइश कितनी है
Dr. Richa Patel रीवा में 21 साल से प्रसूति और स्त्री रोग की प्रैक्टिस कर रही हैं, और हाई रिस्क प्रेगनेंसी उनके काम का बड़ा हिस्सा है।
पिछली रिपोर्ट लेकर एक बार बैठिए। जवाब मिलने के बाद तैयारी करना बहुत आसान हो जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पहले सिजेरियन के बाद दूसरा बच्चा नॉर्मल हो सकता है क्या?
कई मामलों में हाँ। यह इस बात पर निर्भर करता है कि पहला ऑपरेशन क्यों हुआ था, बच्चेदानी पर चीरा किस तरह का था, और इस बार गर्भ कैसा चल रहा है।
दो सिजेरियन के बाद नॉर्मल डिलीवरी हो सकती है?
आमतौर पर नहीं। दो या उससे ज़्यादा सिजेरियन के बाद दोबारा ऑपरेशन ही सुरक्षित रास्ता माना जाता है।
दो डिलीवरी के बीच कितना अंतर होना चाहिए?
कम से कम डेढ़ से दो साल। इससे कम अंतर होने पर पुराने टाँके वाली जगह को पूरी तरह मज़बूत होने का समय नहीं मिलता।
यह फैसला कब लिया जाता है?
गर्भावस्था के दौरान की जांच में, धीरे धीरे। डिलीवरी वाले दिन नहीं।
क्या यह छोटे सेंटर पर करवाया जा सकता है?
नहीं। यह कोशिश सिर्फ़ वहीं होनी चाहिए जहाँ ज़रूरत पड़ते ही तुरंत सिजेरियन किया जा सके।